इंदौर सम्मेलन 2015
रविवार, 29 मार्च 2015 को अहिल्या नगरी इंदौर के दशहरा मैदान पर आयोजित आत्मदृष्टि संत समागम एवं श्रमण संघीय बृहद् साधु-साध्वी सम्मेलन के समापन समारोह ने एक ऐतिहासिक अध्याय रचा। यहाँ देश के 20 प्रांतों से लगभग एक लाख लोग सम्मिलित हुए। वृहद् साधु सम्मेलन का समापन तथा विशाल चतुर्विध संघ सम्मेलन का आयोजन भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।
मुख्य घोषणाएँ: शिवाचार्य श्री जी ने 51000 अहिंसा दूत देश को समर्पित किए, युवाचार्य श्री महेंद्रऋषि जी को श्रमण संघीय युवाचार्य पद की चादर ओढ़ाई गई, और विशाल जनसमूह ने गौवंश वध पर पूरी तरह रोक का आव्हान किया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह, विहिप के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंघल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्रीपद यशोनाइक, मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा, राज्यसभा सांसद डॉ. सत्यनारायण जटिया, श्री दिलीप गांधी, श्रीमती उषा ठाकुर, महापौर श्रीमती मालिनी गौड़ आदि अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
जैन कॉन्फ्रेंस शीर्ष नेतृत्व द्वारा अतिथियों का स्वागत
अतिथियों का स्वागत जैन कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष श्री नेमनाथ जैन, स्वागताध्यक्ष श्री आनंदप्रकाश जैन, श्री रमेश भंडारी, श्री सुभाष ओसवाल, श्री दीपक जैन एवं श्री जिनेश्वर जैन की ओर से किया गया। मंच संचालन श्री हस्तीमल झेलावत ने किया। सम्मेलन में आर. डी. जैन, विवेक विहार, दिल्ली ने जीवदया के लिए एक करोड़ एक लाख रुपये दान देने की घोषणा की।
विशाल पांडाल में हजारों श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति में श्रमण संघीय मंत्री श्री शिरीष मुनिजी म.सा. ने लोगस्स के पाठ से कायोत्सर्ग करवाकर सभा का प्रारम्भ कराया। अर्चना जैन द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत “अभिनंदन हो अभिनंदन हो — पधारे श्रमण संघ सरताज” के बाद 28 मार्च 2015 को दलाल बाग में सम्पन्न राष्ट्रीय युवा सम्मेलन एवं राष्ट्रीय महिला सम्मेलन में लिए गए निर्णयों की जानकारी क्रमशः राष्ट्रीय युवाध्यक्ष महेंद्र पगारिया एवं जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती रेनू डिपीन जैन ने दी।
शिवाचार्य उद्बोधन
शिवाचार्य श्री जी ने देशभर से आए 51000 अहिंसा दूतों को देशसेवा, अहिंसा, गौसेवा, समाजसेवा, महावीर के संदेश के प्रचार और शाकाहार के प्रसार के लिए प्रेरित करने का संकल्प दिलाया। वहीं 1100 ध्यानदूत, 108 ध्यान प्रेरक साधु-साध्वी तथा 31 ध्यान प्रशिक्षकों को भी संकल्प दिलाया गया।
एक लाख श्रावक-श्राविकाओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य डॉ. शिवमुनिजी ने कहा कि हमारे देश की पहचान केवल खजुराहो, ताजमहल, अयोध्या या काशी से नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे देश में गौवंश हत्या एवं मांस के निर्यात को अविलंब रोकने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण, महावीर और महात्मा गांधी के इस देश में गौहत्या हो रही है, गौमांस का निर्यात किया जा रहा है, तथा मांस उत्पादन एवं निर्यात पर सब्सिडी दी जा रही है— इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि कटती गाय हमें कभी माफ नहीं करेगी। जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा की सरकार बहुमत से आने पर संपूर्ण गौवंश वध पर रोक लगाने की बात कहते थे, तो केंद्र सरकार इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रही है। उन्होंने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को गौवंश निषेध कानून शीघ्र लागू करने के लिए बार-बार प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्होंने अहिंसा दूतों को संकल्प दिलाया और देशसेवा के लिए सदैव तत्पर रहने का आव्हान किया।
सम्मेलन समापन के अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि हमने श्रमण संघ की समाचारी को और मजबूत किया है। आप सबका सहयोग श्रमण संघ को शिखर पर पहुंचाएगा। युवाचार्य का मनोनयन काफी विचार-विमर्श के बाद किया गया है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि युवाचार्य श्री महेन्द्रऋषि जी श्रमण संघ की एकता को अक्षुण्ण रखते हुए उसे उच्चता प्रदान करेंगे।
जैन धर्म भारतीय संस्कृति का अनमोल रत्न
इस अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जैन धर्म भारतीय संस्कृति का अनमोल रत्न है। जैन धर्म का पथ भी अहिंसा है और पाठ भी अहिंसा। सांस्कृतिक दृष्टि से ही नहीं, व्यवहारिक दृष्टि से भी जैन धर्म का विशेष महत्व है। जैन जो कहते हैं, वह करते भी हैं। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के सिद्धांतों को मानकर ही वास्तविक रूप में आतंकवाद की समाप्ति संभव है, क्योंकि जैन धर्म अहिंसा का वातावरण पैदा करता है; अहिंसा की सोच रखने वाला व्यक्ति आतंकी गतिविधियों में कैसे शामिल हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि 2400 वर्ष पहले चंद्रगुप्त मौर्य ने भी जैन पद्धति से राजतिलक कराया था। मैं और मेरी सरकार यह प्रयास करेंगे कि गौवंश पर देशभर में पूरी तरह रोक के लिए विधेयक लाया जाए, और इसके लिए आम सहमति के प्रयास किए जाएंगे, ताकि इस विषय पर अहम फैसला हो सके। उन्होंने कहा कि जैन लोग एक चींटी की जान न जाए, इसके लिए सड़कों पर झाड़ू लगाते हैं, तो हम गौहत्या की स्थिति कैसे सहन कर सकते हैं। उन्होंने गौवंश की हत्या एवं मांस निर्यात पर रोक के संदर्भ में अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
स्वयं को जीते, वह दूसरे के लिए जिए — वही जैन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक संत का दर्शन कल्याण कर देता है; यहाँ तो सैकड़ों संत-साध्वियों के दर्शनों का अवसर मिला है। सरकार वही है जो संतों का निर्देश माने। असल में स्वयं को जीते और दूसरों के लिए जिए, वही जैन है। यह कार्य जैन समाज ही करता है; केवल उपनाम से कोई जैन नहीं हो जाता।
मुख्यमंत्री ने आचार्यश्री शिवमुनिजी से कहा— मुझे सद्बुद्धि दो, सन्मार्ग की प्रेरणा दो, मध्यप्रदेश को और बेहतर बनाने के लिए सामर्थ्य प्रदान करो। उन्होंने कहा कि हम गौहत्या पर रोक लगा चुके हैं; गौहत्या ही नहीं, गौमांस के परिवहन, विक्रय आदि करने वालों पर भी मानव-हत्या जैसे कठोर प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई होगी। जिस वाहन में यह पाया जाएगा, वह राजसात कर लिया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 24.99 प्रतिशत तक पहुँची है। संतों की कृपा रही तो मध्यप्रदेश इतना अन्न उत्पन्न करेगा कि पूरा देश मध्यप्रदेश के अन्न से पेट भर सकेगा। मध्यप्रदेश से मांस निर्यात पर भी रोक लगा दी गई है।